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फ़रवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Cancer ke karan

Cancer ke karan - कैंसर एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है। कैंसर अगर हो गया तो पेशेंट की जान बच ना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। बहुत सारे लोगों की जान कैंसर की वजह से हर साल जाती है। अगर कैंसर फर्स्ट स्टेज में हो तो वह ठीक हो सकता है। लेकिन सेकंड और थर्ड स्टेज का कैंसर ठीक नहीं होता और पेशेंट की मृत्यु तय हो जाती है। ऐसे कई सारे कारन है जिन से कैंसर होता है इसमें से कुछ कारण ऐसे भी है जो हमारे रोजमर्रा की जिंदगी में हम इस्तेमाल करते हैं। पर हमें यह पता भी नहीं होता कि इन से कैंसर हो सकता है। कैंसर के कारण क्या है? कौन कौन से घरेलू चीजों से कैंसर होता है? यह जानने के लिए पढ़ते रहे।
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कैन्सर के कारण 1. Viruses- कैंसर कॉजिंग वायरस, ऐसे बहुत सारे वायरस होते हैं जिन से कैंसर होता है। HPV virus,  एचपीवी ह्यूमन पेपिलोमा वायरस human papilloma virus, IBV- Ipsian bar virus वायरस, sarcoma virus- सार्कोमा वायरस। स्टडी के मुताबिक यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फाइल सकते हैं। और कैंसर पैदा कर सकते हैं, यह वायरस, अनप्रोटेक्टेड सेक्स और क्लोज कांटेक्ट से फैलते हैं।

Types of iv fluids in hindi । सलाइन के प्रकार।

सलाईन के प्रकार-   जब आप सब लोग बीमार पड़ते हैं तो सब लोग डॉक्टर के पास जाते हैं। डॉक्टर आपको चेक करेंगे और अगर आप की बीमारी थोड़ी होगी तो आपको गोलिया देंगे। अगर थोड़ी ज्यादा होगी तो आपको इंजेक्शन देंगे।बहुत ज्यादा होगी, बहुत ही विकनेस होगा और बहुत दिनों से होगी तो वह आपको सलाइन यानी कि IV FLUIDS  लगाएंगे। आप में से कई लोगों ने कम से कम एक बार तो सलाइन लगा ली होगी। बहुत सारे लोगों के मन में इस विषय में एक प्रश्न आता है कि SALINE सलाइन कितने प्रकार की होती है? और कौन-कौन सी बीमारी में कौन-कौन सी सलाइन लगाई जाती है? तो इस आर्टिकल में आपको आईवी फ्लुएड्स सलाइन के बारे में पूरी जानकारी दूंगा।
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      Types of iv fluids  सलाइन टोटल पांच प्रकार की होती है। RL, NS, DNS, D5,D10। यह100ml, 500 ml, 1l,2l  में आती है।  यह पेशेंट के बीमारी और कंडीशन के हिसाब से लगाई जाती है।

Tips to increase height 

1.RL- Ringer lactate रिंगर लेक्टेट इसमें सोडियम लेक्टेट sodium lactate,सोडियम क्लोराइड sodium lactate, पोटेशियम क्लोराइड potassium chloride, कैलशियम क्लोराइड calcium  chloride…

प्रेगनेंसी रोकने के उपाय। pregnancy rokne ki dawa।

Pregnancy rokne ki dawa -ऐसा ट्रेन्ड चल  रहा है कि, अगर किसी की शादी हो जाए तो वह कहते हैं कि हमें जल्दी बच्चा नहीं चाहिए। अभी भी हम एंजॉय करना चाहते हैं। बहुत सारे शादीशुदा लोग तीन-चार साल तक बच्चा ना होने देना ही बेहतर समझते हैं। आजकल हमारा समाज बहुत ही मॉडर्न हो गया है इसमें गर्लफ्रेंड बीएफ  गलत नहीं समझा जाता। अभी तो नववी दसवीं कक्षा के लड़का लड़की भी बॉयफ्रेंड बना रहे हैं। तो इस उम्र में उनसे गलती होने के चांसेस बहुत ही ज्यादा होते हैं। गलती से लड़की प्रेग्नेंट भी हो सकती है। तो इन दोनों केसेस में अगर आप शादीशुदा है और आपको बच्चा नहीं चाहिए।और आपकी शादी नहीं हुई हो तो आपको बच्चा ना होने के लिए क्या-क्या प्रिकॉशंस लेने चाहिए? तो इस आर्टिकल में आपको यही बताऊंगा।
     प्रेग्नेंसी रोकने के उपाय 1.condom- यह सबसे सिंपल और सरल उपाय है। और सबसे अच्छा भी है। हर बार यौन संबंध बनाते समय कंडोम का इस्तेमाल करें। यह बहुत ही कारगर मेथड है। जिनकी शादी नहीं हुई उनके लिए तो सबसे बेस्ट है। यह किसी भी मेडिकल स्टोर में आसानी से मिल जाता है।
Haath pairon me pasina aana

2. अगर कभी ऐसा हो कि आप हड़…

पीलिया । jaundice in hindi।

जौंडिस - जॉन्डिस इसी हिंदी में पीलिया भी कहते हैं। यह बहुत ही कॉमन सा आजार है। यह कभी भी हो सकता है और यह उम्र की सीमा नहीं रखता। यानी यह कभी भी और किसी भी उम्र में किसी को भी आ सकता है। इसका कोई स्पेसिफिक सीजन भी नहीं होता।
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   Definition of jaundice  पीलिया आना किसे कहते हैं? पीलिया यानी पूरा शरीर पीला पड़ जाता है। आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाता है। और पेशाब को भी पीला ही होता है। इसका कारण क्या है?   शरीर में बड़ी हुई बिलीरुबिन की मात्रा से जब शरीर पीला पड़ जाए तो उसे पीलिया यानी  जॉन्डिस कहते हैं।  आपको इस आर्टिकल में पीलिया के बारे में पूरी तरह से साइंटिफिक चीजें  चलेंगी।    Jaundice types। पीलिया के प्रकार।   1.infective hepatitis- इनफेक्टिव हेपेटाइटिस जब लीवर को वायरस का इंफेक्शन हो जाए तो उसे इनफेक्टिव हेपिटाइटिस कहते हैं। यह एक वायरल viral इंफेक्शन है।  वायरस का नाम है hepatitis  virus हेपेटाइटिस वायरस यह वायरस पांच प्रकार के होते हैं। hepatitis A,B,C,D&E viruses, हेपेटाइटिस ए,बी, सी,डी और ई ,  इसमें सबसे कॉमन है हेपेटाइटिस ए वायरस।यह सबसे कम खत…

हाई बीपी । high bp treatment in hindi।

High bp treatment in hindi- हाई बीपी के पहले पार्ट में मैंने आपको बीपी क्या है, वह कैसे होता है और उसे पहचाने कैसे;  यानी हाई बीपी के लक्षण कौन से हैं?  इसके बारे में विस्तार से बताया है। इस पार्ट टू part 2 में, मैं आपको आपका bp न बढ़े इसके लिए आपको क्या क्या पथ पालना चाहिए? क्या क्या नहीं करना चाहिए? क्या क्या खाना चाहिए? क्या नहीं खाना चाहिए? यह बताऊंगा। उसकी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट और एलोपैथिक ट्रीटमेंट भी बताऊंगा।
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     Precautions in high bp (पथ)      हाई बीपी में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि खाने में नमक बहुत ही कम रखना। क्योंकि हम इंडियंस के खाने में बहुत ही ज्यादा नमक होता है। ज्यादा ऑइली , स्पाइसी, मसालेदार, घी वाला खाना आपको नहीं खाना चाहिए। ज्यादा तीखा खाना भी आप छोड़ दें। यह सब के सब बहुत ही लिमिट में या फिर कम करें। बहुत ही ज्यादा शुगर वाला मीठा खाना, यानी मिठाइयां, शुगर, जलेबी इ. यह भी आप को एकदम से कम करना होगा।

     बीपी के पेशेंट को मटन, अंडा, चिकन, पूरी तरह से बंद करना चाहिए। नमक और  nonveg मटन, अंडा, चिकन, बंद करना पूरी तरह से, यह सबसे इंपो…

ब्लड प्रेशर । high B P. Symptoms in hindi ।

ब्लड प्रेशर-   हाई बीपी यानी हाइपरटेंशन। हाय  बीपी यानी बीपी का बढ़ना, यह एक अचानक से समझने वाली बिमारी  है। क्योंकि आप किसी दूसरे कारण से डॉक्टर को दिखाएंगे, जैसे कि सिर दुखना, चक्कर आना, इत्यादि तब डॉक्टर आपका BP चेक करेंगे; और आपको बताएंगे कि आपका बीपी बढ़ गया है। तभी आपको पता चलता है कि आपको बीपी की बीमारी है।
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सिर्फ आप ही नहीं हर तीसरे घर में कम से कम एक  तो पेशेंट हाई बीपी का मिल ही जाता है। तो हम सब लोगों के लिए बीपी के बारे में पूरी जानकारी होना बहुत ही महत्वपूर्ण है।  बीपी क्या है?  इसके लक्षण कौन-कौन से होते हैं ? यह कौन से कारणों से होता है? और इससे बचने के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए?

Malaria vaccine 

        बीपी किसे कहते हैं      ब्लड जब हमारी नसों में यानी धमनियों में दौड़ता है, तो उसका जो प्रेशर यानी दबाव धमनियों पर पड़ता है उसे बीपी कहा जाता है । यानी कि ब्लड प्रेशर।
     नार्मल रेंज ऑफ़ बीपी        बीपी के दो रिडिंग्स होते हैं एक ऊपर का बीपी Systolic bp  और नीचे का बीपी diastolic bp ।इसकी नार्मल रेंज है ऊपर का 120 mmhg एमएमएचजी और नीचे …

Diet for sugar patientin hindi। डायबिटीज में क्या खाना चाहिए?

Diet for sugar patient - 21वीं सदी में , हमारे समाज में डायबिटीज यानी शुगर के पेशेंट की संख्या बहुत ही ज्यादा बढ़ गई है। हालांकि यह अनुवांशिक यानी जेनेटिक बीमारी है। जेनेटिक यानी कि अगर आपके दादा को होगी तो आपके पिताजी को हो सकती है, पिताजी को होगी तो आपको हो सकती है। आपको होगी तो आपके बच्चे को हो सकती है। लेकिन आज कल की फास्ट लाइफ, व्यायाम का अभाव, जंक फूड्स का अति सेवन, बैठा काम और स्ट्रेस के कारण यह बीमारी बहुत ज्यादा फैल रही है।
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     शुगर के पेशेंट को हर वक्त यह डर सताता है कि मैं क्या खाऊं और क्या न खाऊँ? और जो खाऊँ  वह कितना मात्रा में खाऊँ? जिससे मेरे शुगर लेवल कंट्रोल में रहे। तो इस ब्लॉग में मैं यही बताऊंगा कि शुगर के पेशेंट को क्या-क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, क्या क्या थोड़ी मात्रा में खाना चाहिए और कब कब खाना चाहिए। और क्या नहीं खाना चाहिए । यानी शुगर के पेशेंट का पूरा डाइट प्लान
Tips to increase height 

  डायबिटीज में पूरी तरह से वर्ज करने वाली चीजें    डीप फ्राइड फूड्स, जंक फूड्स - जैसे कि पकौड़ा, समोसे, भजिया, पिज़्ज़ा बर्गर, पास्ता …

दाद खाज खुजली का इलाज। fungal infection treatment in hindi ।।

दाद खाज खुजली का ईलाज -   यह ब्लॉग खासकर उन लोगों के लिए है, जो फंगल इन्फेक्शन यानी कि दाद खाज खुजली की दवाइयां लेकर थक गए हैं;  लेकिन वह ठीक नहीं हो रहा। कुछ लोगों को यह थोड़ा-थोड़ा या थोड़ी ही जगह पर होता है। और कुछ लोगों को यह बहुत ज्यादा यानी पूरे शरीर पर होता है। पहले वक्त थोड़ा सा ही होता है एक दो जगह ही, फिर वापिस बढ़ते बढ़ते जा कर पूरे शरीर पर आ जाता है।
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   कुछ लोग रिंगार्ड लगाते हैं, क्योंकि यह बहुत ही फेमस दवाई है। कुछ लोग मेडिकल में जाकर केमिस्ट की सलाह से औषधि लेते हैं लगाते हैं। पर कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा, या आपने डॉक्टर को भी दिखाया होगा, डर्मेटोलॉजिस्ट को - यानी त्वचा के स्पेशलिस्ट को, और कुछ लोगों ने तो बहुत महीनों तक दवाई ली होगी। पर अगर आपका दाद खाज खुजली ठीक नहीं हो रहा; तो मैं आपको इसका पूरी तरह से रामबाण इलाज बताऊंगा, जिसकी वजह से फंगल इन्फेक्शन पूरी तरह से और हमेशा के लिए ठीक हो जाए।
   दाद होने की जगह       दाद पूरे शरीर पर कहा कहा होता है? वैसे तो यह पूरे शरीर पर किधर भी हो सकता है, लेकिन ज्यादातर यह जांघों के बीच में, चेहरे पर , क…

HIV symptoms in hindi । एड्स के लक्षण।

HIV symptoms in hindi -   नमस्कार दोस्तों मैं आपका हेल्थ एडवाइजर डॉ योगेश महाडिक । आज का  ब्लॉग एचआईवी एड्स के ऊपर है, एचआईवी ऐड्स एक महा भयंकर रोग है ।इसका डर समाज में बहुत ज्यादा है, हर किसी के मन में जिंदगी में एक बार तो यह सवाल आता है कि मुझे एड्स तो नहीं ? मुझे यह लक्षण  दिख रहे हैं वह लक्षण दिख रहे हैं; मुझे यह हो रहा है वह हो रहा है तो मुझे एड्स तो नहीं ? तो इस वीडियो में मैं आपको आपके सारे डाउट क्लियर कर दूंगा क्योंकि इस वीडियो में में एचआईवी एड्स के सारे लक्षणों के बारे में पूरे विस्तार से बताऊंगा और पूरी जानकारी दूंगा, एक भी लक्षण नहीं छूटेगा।
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      1. Thrush आना पहला लक्षण है जीभ और मुंह में थ्रश आना, thrush क्या  होता है? थ्रश एक सफेद सी मोटी सी परत है जो जीभ और मुंह में जमा होती है। नॉर्मल इंसान में जीभ लाल होती है और पूरी तरह से स्वच्छ होती है; उस पर कोई भी परत नहीं होती। लेकिन एचआईवी ऐड्स में जीभ और मुंह में  सफेद और पीली परत जमा होती है और वह भी कड़वा हो जाता है।

     2. unexpected weight loss- दूसरा लक्षण यह है कि अचानक से खूब सारा वजन…